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Ranveer Singh : रणवीर सिंह के न्यूड फोटोशूट पर हो सकती है 5 साल की जेल ,जानिए क्या है अश्लीलता का पैमाना और कानून?

बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह (Ranveer Singh) के खिलाफ मुंबई पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई है. एक गैरसरकारी संगठन ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एक पत्रिका के लिए नग्न फोटोशूट करा कर उसकी तस्वीरें साझा की हैं. बॉलीवुड कलाकारों पर इस तरह के आरोप नई बात नहीं है. लेकिन जब भी ऐसा कुछ होता है तो एक बहस शुरू हो जाती है कि आखिर इस तरह के प्रदर्शन की सीमा क्या है? और कब इस तरह का कोई काम अश्लीलता (Obscenity) के दायरे में आ जाता है और अश्लीलता के  बारे में हमारे देश के कानून (Law for obscenity) की क्या स्थिति है.

पहले भी आए है की मामले
भारत में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जब बॉलीवुड कलाकारों सहित अन्य लोगों को अश्लील बर्ताव, अश्लील सामग्री और अश्लील भाषा के लिए कानून के दायरे में लाकर उन पर मुकदमा चला है. इससे पहले भी साल 2020 में एक्टर और मॉडल मिलिंद सोमन और पूनम पांडे पर इस तरह के मामले में कार्रवाई हो चुकी है. सोशल मीडिया और इंटरनेट के बाद से इस तरह के कानून और भी सख्त हो गए हैं.

का कहता हमारा कानून
भारत में अश्लीलता संबंधी कार्यों के लिए प्रमुख रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत सजा का प्रावधान है. कोई भी काम अशलीलता के लिहाज से अपराध की श्रेणी में तब आ जाता है, जब वह दूसरों के लिए तकलीफ या परेशानी की वजह बन जाता है. इसी तरह से अश्लील साहित्य को भी धारा 292 के तहत अपराध की श्रेणी में रखा गया है. लेकिन इसके अलावा भी कई और धाराएं अश्लीलता को लेकर बनी हैं.

कौन कौन धार लगाई गई हैं रणवीर के खिलाफ
लेकिन रणवीर सिंह के खिलाफ कई धाराएं लगाई गई हैं. एनजीओ ने उनके खिलाफ  भारतीय दंड सहिता की धारा 292 के अलावा 293, 509 और सूचना तकनीकी एक्ट की धारा 67 (A) के तहत मामला दर्ज कराया है और जल्द से जल्द उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. सूचना तकनीकी एक्ट सोशल मीडिया और इंटरनेट की वजह से बना है. रणवीर के खिलाफ दर्ज मामलों में उन्हें तीन महीने से लेकर सात साल तक की सजा हो सकती है.
क्या होगी सीमा या दायरा
इस मामले में धारा 67 अहम है, जिसके मुताबिक कोई भी व्यक्ति अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित करता है या प्रसारित करता है तो वह सजा का हकदार होता है. लेकिन एक बड़ा सवाल यही है कि आखिर अश्लीलता की सीमा क्या है? क्या है जो कला के दायरे से निकल कर अश्लीलता के दायरे में आ जाता है और इसका निर्धारण कौन करेगा या कैसे किया जाएगा.
अश्लीलता की परिभाषा
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के मुताबिक अश्लीलता के दायरे में वह सब आता है, जो स्वीकार्य नैतिकता और शालीनता के मानदंडों के लिहाज से अप्रिय, अपमानजनक या घृणित की श्रेणी में आ सकता है. लेकिन कानून के मामले में यह परिभाषित करना आसान नहीं है. धारा 292 में विस्तार से बताया गया है कि कैसे कोई कार्य इसके दायरे में आ सकता है.
क्या कहती है यह धारा
इसके अनुसार किसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र रूपण, आकॄति या अन्य वस्तु को अश्लील समझा जाएगा यदि वह कामुक है या कामुक व्यक्तियों के लिए रुचिकर है या उसका या (जहां उसमें दो या अधिक सुभिन्न मदें समाविष्ट हैं वहां) उसकी किसी मद का प्रभाव, समग्र रूप से विचार करने पर, ऐसा है जो उन व्यक्तियों को दुराचारी या भ्रष्ट बनाए जिनके द्वारा उसमें अन्तर्विष्ट या समाविष्ट विषय का पढ़ा जाना, देखा जाना या सुना जाना सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हए सम्भाव्य है.

इस धारा के साथ 293 में अश्लील सामग्री बेचने आदि को लेकर प्रावधान हैं तो 509 और 67 में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को शामिल किया गया है. सामान्यतः ऐसे मामले में कोर्ट विषयवस्तु के प्रभाव को अहमियत देता है. देखा गया है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट भी ऐसे मामलों में सख्त होता दिखाई दिया है. फिर भी यह भी सच है कि जिस तरह से सामुदायिक मानदंडों में बदलाव होते हैं, उसी तरह से अश्लीलता की परिभाषा भी बदलती रहती है.

इसके अलावा भारतीय संविधान की धारा 19, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ उसमें अपवादों का भी जिक्र है, इस बहस का हिस्सा बन जाता है. रणवीर सिंह के मामले में उनकी मंशा के साथ उनके काम के प्रभाव को आधार बनाने की संभावना है.

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