CUCET 2022 : 12 वीं की भुमिका हुई खत्म, CUET 2022 के माध्यम से होगा UNDER GRADUATE COURSE में प्रवेश

UGC ने देश की सभी 45 सेंट्रल यूनिवर्सिटी और उनसे जुड़े कॉलेजों के अंडर ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) को अनिवार्य बनाकर शिक्षा में सुधार की एक बड़ी पहल की है। इन तमाम यूजी कोर्स में एडमिशन के दौरान अब 12वीं की बोर्ड परीक्षा में हासिल नंबरों की कोई भूमिका नहीं होगी। यूजीसी ने साफ किया है कि यूनिवर्सिटी चाहें तो 12वीं के नंबरों को विभिन्न कोर्सों के एंट्रेंस टेस्ट में शामिल होने की पात्रता का आधार बना सकती हैं, लेकिन एडमिशन पूरी तरह से सीयूईटी (CUET)में हासिल नंबरों के ही आधार पर होगा। इस व्यवस्था का पहला स्वागत योग्य परिणाम यह होगा कि विभिन्न कॉलेजों में एडमिशन की अतार्किक ढंग से ऊंची कटऑफ लिस्ट (CUET CUT OFF) अतीत की बात बन जाएगी।

CUCET CUT OFF / CUET CUT  2022 

                                         

 नई व्यवस्था करेगी विसंगतियों को दूर


ऊंची कटऑफ की समस्या दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में खास तौर पर देखी जाती है। कॉलेजों की ऊंची कटऑफ लाइन 2021 में भी रेकॉर्ड तोड़ती नजर आई, जबकि उस दौरान कोरोना महामारी से उपजे हालात के चलते स्कूल ज्यादातर बंद ही रहे। डीयू के सात कॉलेजों ने दस कोर्सों के लिए इस साल भी पहली कटऑफ लिस्ट 100 फीसदी नंबर की घोषित की थी। विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्डों की अलग-अलग मूल्यांकन पद्धतियों के मद्देनजर देश के अलग-अलग हिस्सों के स्टूडेंट्स के लिए यह व्यवस्था असंगत साबित हो रही थी। नई व्यवस्था इस विसंगति को दूर करेगी।
12वीं के मार्क्स से नहीं होंगे प्रवेश

हालांकि एक झटके में जिस तरह से 12वीं की मार्क्सशीट को सब कुछ मानने वाली व्यवस्था की जगह उसे कुछ नहीं मानने वाली व्यवस्था लागू की जा रही है, उससे शुरू में कुछ दिक्कतें महसूस हो सकती हैं। 12वीं के बहुत से स्टूडेंट्स इसे लेकर आशंकित भी हैं। ध्यान रहे कि इसी साल सीबीएसई बोर्ड परीक्षा को दो अलग-अलग टर्मों में बांटा गया। यही नहीं, पहले टर्म के नंबर तब आए जब दूसरे टर्म की परीक्षाएं सिर पर आ चुकी थीं। इसके अलावा सीयूईटी परीक्षा के लिए आवेदन अप्रैल में मंगवाए जाएंगे और परीक्षा जुलाई में आयोजित की जानी है। जाहिर है, तैयारी के लिए ज्यादा वक्त नहीं होगा। कम से कम इस बैच के स्टूडेंट्स के लिए यह सब खासा तनाव पैदा करने वाला साबित हो सकता है।
नई व्यवस्था छात्रों के लिए लाभदायक

बावजूद इसके, पुरानी व्यवस्था का खात्मा जरूरी था। अब नई व्यवस्था से पैदा होने वाली शुरुआती असुविधाओं के हल खोजे जाएं और यह भी याद रखा जाए कि नई व्यवस्था भी सभी समस्याओं का हल नहीं है। इसके जरिए देश भर के स्टूडेंट्स की क्वॉलिटी एजुकेशन तक पहुंच को आसान बनाने की कोशिश की गई है, पर स्टूडेंट्स की संख्या और सीटों के अनुपात को बदलने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि डीयू जैसी यूनिवर्सिटी में सीटों की संख्या प्रवेश के इच्छुक स्टूडेंट्स के मुकाबले कम ही पड़ने वाली है। यह एक बड़ी और जटिल समस्या है। जाहिर है, इसके लिए बड़े सुधार की जरूरत है।

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