UTTAR PRADESH VIDHAN SABHA ELECTION 2022: अपने हुए पराए….. BJP ने लगाए दूसरे पार्टी से आएं प्रत्याशियों पर दाव……. जानिए क्या है रणनीति?

 UTTAR PRADESH VIDHAN SABHA ELECTION 2022: अपने हुए पराए….. BJP ने लगाए दूसरे पार्टी से आएं प्रत्याशियों पर दाव……. जानिए क्या है रणनीति?

अब कुछ ही दिनों में पहले चरण के मतदान होने से पहले पूरे उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सभी दल के वरिष्ठ नेता कार्यकर्ता और पदाधिकारी जमकर अपनी पार्टी के लिए समर्थन मांग रहे हैं और ताबड़तोड़ प्रचार कर रहे हैं…..

इन सबके बीच खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है कोई कोविड-19 प्रोटोकॉल तोड़ रहा है तो कोई चुनाव आयोग की नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पाया जा रहा है।

चुनाव के वक्त अक्सर यह देखा जाता है कि बहुत सारे प्रत्याशी दलों को छोड़कर दूसरे दल में भागते हैं।

चुनाव के एन समय पर दूसरे दलों में भागना और अपनी दावेदारी मजबूत करना और अपना टिकट पक्का करना ही इन नेताओं की सोच होती है ।

मगर चौकाने वाली बात तब जाती है जब पिछले 5 वर्ष से प्रदेश में शासन कर रहे भारतीय जनता पार्टी की सूची देखी जाए तो इसमें “अपनों से ज्यादा, पराए पर विश्वास है “यह कथन सत्य साबित होती हुई नजर आती है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम दल अपनी-अपनी जीत की रणनीति तैयार कर रही हैं। सभी राजनीतिक दलों का एक ही मकसद है की जीत किसी भी कीमत पर उन्हीं की होनी चाहिए।

तमाम दल विधानसभा चुनाव में जीत को ही अंतिम लक्ष्य मानकर चल रहे हैं और तमाम ऐसे चेहरे पर दाग लगा रहे हैं जो जीतने की क्षमता रखते हैं……. मगर ऐसे में विचारधारा और संगठन के प्रति समर्पण भाव का मामला काफी पीछे छूट जाता है।

2017 की तरह भारतीय जनता पार्टी इस बार भी दूसरे दलों से आए नेताओं पर दांव लगाने को तैयार है क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में यह दाव हिट रहा।

आपको बता दें कि 2017 विधानसभा चुनाव में करीब तीन चौथाई सीटों पर जीत के साथ सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी यह दावा करती है कि उनके काम से जनता गदगद है और उन्होंने अपना मन बना लिया है भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में वोट करने का।।

जब भारतीय जनता पार्टी यह बात कहती है कि उनके कामों से जनता गदगद हुई है प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज हुई है इसके बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी अपने लोगों को पीछे छोड़ कर दूसरे दलों से आए नेताओं पर भरोसा जता रही है और यह हकीकत है कि कार्यकर्ताओं के दावों के बीच सिस्टम में रहकर सहानुभूति रखने का इनाम टिकट के तौर पर अफसरों को दिया जा रहा है।।

एके शर्मा, असीम अरुण से लेकर राजेश्वर सिंह जैसे नाम इसके उदाहरण है…

सिधौली सीट से समाजवादी पार्टी से टिकट कटने पर मनीष रावत का भाजपा विचारधारा से मन प्रभावित हुआ और इसके तुरंत बाद ही पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बना दिया। यह कोई एक उदाहरण नहीं है आपको ढेर सारे उदाहरण मिल जाएंगे।

आपको बता दें की आगरा से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक धर्मराज 12 जनवरी को भाजपा की नीतियों से प्रभावित हुए तो भाजपा ने भी उनकी जनसेवा पर 3 दिन बाद ही टिकट पर मुहर लगा दी।

बागियों को टिकट देने के लिए भारतीय जनता पार्टी अपने सिटिंग विधायकों को भी कुर्बान करने के लिए तैयार है।

अनिल सिंह नितिन अग्रवाल राकेश सिंह नरेश सैनी हरिओम यादव समेत ऐसे नामों की लंबी फेहरिस्त है जो टिकट के नाम पर टिकट के आश्वासन पर भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं…

कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी में आए पूर्व सांसद राकेश सचान को भगवानपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बना दिया गया इसके अलावा उनकी पत्नी सीमा सचान को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है और ताज्जुब की बात यह है की भवानीपुर सीट से भाजपा ने फायर ब्रांड नेता और उनके विधायक विनय कटियार का टिकट काटकर सचान को टिकट दिया है।।

लखनऊ कैंट सीट (LUपर भाजपा सांसद डॉ रीता बहुगुणा जोशी(MP DR.RITA BAHUGUNA JOSHI) के लगातार दबाव के बाद भी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया वही योगी सरकार में मंत्री स्वाति सिंह(SWATI SINGH) और उनके पति दयाशंकर सिंह के बीच टकराव के कारण सरोजनी नगर ईडी(ED) की सेवा से राजनीति में आए राजेश्वर सिंह के पास चला गया….

यह है आज की बदलती राजनीति, अब आपको तय करना है कि आपको किस ओर जाना है. लगभग तमाम पार्टियों का यही हाल है और सिर शर्म से तब झुक जाता है, जब जीत पाने के लिए विचारधारा और समर्पण की कीमत खत्म हो जाती है……..

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