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Allahabad University : ऑफलाइन परीक्षा के विरोध में छात्रों का विशाल धरना प्रदर्शन कल , ऑफलाइन परीक्षा से बहुत सारे छात्र हैं नाराज !

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के खुलने के साथ ही चहलकदमी तेज हो गयी है। एक तरफ जहां छात्र-छात्राओं के विश्विद्यालय खुलने की खुशी  है तो दूसरी तरफ छात्रों के बीच निराशा भी व्याप्त है। छात्र निराश आगामी परीक्षाओं को लेकर है। इसे लेकर ही कल इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों का महाआंदोलन किया जाएगा।




पहले भी हुआ था आंदोलन, 2 दिन का मांगा गया था समय

ऑफलाइन परीक्षा के विरोध में 2 दिन पहले भी आंदोलन किया गया था।छात्रों के भारी भीड़ को देखते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने 2 दिनों का समय मांगा था उन्होंने कहा कि हम बैठक कर इस विषय पर निर्णय दो दिनों में देंगे।परन्तु दो दिन हो चुके ऑफलाइन परीक्षा को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है । इसलिए छात्र एक बार फिर हज़ारों की संख्या में परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का घेराव करने की तैयारी में है।



ऑनलाइन पढ़ाई ही है असल मुद्दा

 छात्रों का कहना है कि पूरे कोरोना काल मे छात्रों की कक्षाएं सही से नहीं चलायीं गयी हैं। कुछ छात्रों  ने कहा कि अभीतक सिलेबस पूरा नहीं किया गया है।अब 2 महीने बाद एग्जाम है तो इतने कम समय में सिलेबस पूरा करना मुश्किल है। चूंकि छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं 2 महीने बाद होंगी जिससे सत्र का लेट होने का खतरा ज्यादा है।इन तमाम बिंदुओं को लेकर ही कल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र आंदोलन करेंगे।



ऑनलाइन परीक्षा अथवा असाइनमेंट बेस्ड परीक्षा की है मांग

छात्र-छात्राओं की मांग है कि आगामी परीक्षा तय समय पर ऑनलाइन माध्यम में ही आयोजित की जाए।छात्रों ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ऑनलाइन परीक्षा आयोजित नहीं करा सकता तो असाइनमेंट बेस्ड परीक्षा ले जिससे छात्र-छात्राओं को भी कोई दिक्कत ना हो और सत्र भी लेट ना हो तथा आगामी कक्षाएं ऑफलाइन माध्यम में सही तरीके से चल सके।चूंकि ऑनलाइन पढ़ाई सही तरीके से हुई नहीं है इसलिए छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने को तैयार है।


विभिन्न छात्र संगठनों का समर्थन

छात्रों के इस आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। जहाँ “दिशा छात्र संगठन” ने इस आंदोलन की शुरुआत की वहीं NSUI भी छात्रों के साथ खड़ा है। NSUI के अभिषेक द्विवेदी ने कहा कि छात्रों की मांग जायज है विश्विद्यालय को अपना फैसला बदलना होगा क्योंकि ऑनलाइन कक्षाओं से सभी वाकिफ है।

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